परामर्श से व्यक्ति को इस व्यसन की जड़ों को समझने में मदद मिलती है और वह फिर से सामान्य जीवन जी सकता है। विशेष रूप से किशोरों के लिए पुनर्वास केंद्र होने चाहिए जहां उन्हें मोबाइल और इंटरनेट से दूर रखकर रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखा जाए। अनुचित सामग्री के कारण बिगड़ी हुई मानसिक संरचना को सुधारने के लिए मनोचिकित्सकों की मदद लेना समय की मांग है। समाज को इस व्यसन को एक बीमारी के रूप में देखना चाहिए, ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना संकोच के उपचार के लिए आगे आए।
