8.1 मूल प्रावधान

8. अभिग्रहणों को रजिस्टर करना – जब पशु कांजी हौस में लाए जाएं तब कांजी हौस रखवाला अपने रजिस्टर में निम्नलिखित की प्रविष्टि करेगा-

(क) जीव-जन्तुओं की संख्या और वर्णन,

(ख) वह दिन और समय जब वे वहां ऐसे लाए गए,

(ग) अभिग्रहण करने वाले का नाम और निवास स्थान, और

(घ) स्वामी का, यदि ज्ञात हो, नाम और निवास स्थान,

तथा अभिग्रहण करने वाले या उसके अभिकर्ता को प्रविष्टि की एक प्रति देगा।

कृपया इस ब्रिटिश कालीन कानून को निरस्त करने हेतु नीचे दिए लाल बटन को प्रेस करिए। अपना मेल एप एवं अकाउंट सिलेक्ट करिए, मेल अपने आप टाइप होकर आ जाएगा। आपको केवल सेन्ड करना हैं।

8.2 विश्लेषणात्मक आलोचना

यह धारा कांजी हौस रखवाले द्वारा पशुओं के अभिग्रहण (ज़ब्ती) का सटीक रिकॉर्ड कैसे रखा जाए उसके लिए प्रावधान देती हैं। जब भी अभिग्रहणकर्ता अतिचार करने वाले पशुओं को पकड़कर कांजी हौस लाता है, तो रखवाले को तुरंत अपने रजिस्टर में चार मुख्य बिंदुओं को दर्ज करना अनिवार्य था:

  1. पशुओं का विवरण: कितने पशु लाए गए हैं और उनका विस्तृत वर्णन (जैसे रंग, नस्ल, चिह्न)।
  2. समय और तारीख: किस दिन और ठीक किस समय वे पशु कांजी हौस में लाए गए।
  3. अभिग्रहणकर्ता की पहचान: पशुओं को पकड़ने वाले व्यक्ति (अभिग्रहणकर्ता) का पूरा नाम और उसका निवास स्थान।
  4. मालिक की पहचान: यदि पशुओं के स्वामी का नाम और निवास स्थान ज्ञात हो, तो उसकी जानकारी।

इसके अलावा, रखवाले को इन दर्ज की गई जानकारियों की एक प्रति अभिग्रहणकर्ता या उसके एजेंट को देनी होती थी। यह प्रति रसीद के रूप में काम करती थी और अभिग्रहणकर्ता के रिकॉर्ड के लिए महत्वपूर्ण होती थी। उस समय ये सब हाथ से फिर से लिखना पड़ता था।

इतनी विस्तृत जानकारी (पशु का वर्णन, समय, अभिग्रहणकर्ता का नाम) दर्ज करने की अनिवार्यता पहली नज़र में अच्छी लगती है, लेकिन ग्रामीण भारत में, जहाँ साक्षरता कम थी, यह प्रक्रिया जटिलता पैदा करती थी। अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था और हर गाव मे मौजूद गुरुकुलों की जगह अन्य कोई पाठशाला की स्थापना भी नहीं की थी इसके कारण उस समय गावों मे निरक्षरता थी।

दो पदों पर काम करने वाले कर्मचारी अक्सर तुरंत रिकार्ड लिखने के लिए कांजी हौस मे मौजूद भी नहीं होते थे। ऐसे मे कई बार कई घंटों तक लाए गए पशु को चारा और पानी भी नहीं दिया जाता था। यह एक तरह से पशुओं पर भी अत्याचार ही था। अगर रिकार्ड तुरंत नहीं लिखा गया तो कई बार भूख और प्यास से पशुओं के बछड़ों की मृत्यु भी हो जाती थी जिसकी क्षतिपूर्ति कभी भी उस पशु के मालिक को नहीं मिलती थी। इसका अर्थ यह भी हैं की ब्रिटिश नीतियाँ न केवल भारतीयों पर अन्याय करती थी ये पशुओ को भी प्रताड़ित करती थी।

8.3 संशोधन हेतु सुझाव

पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 8 पर विश्लेषण यह उजागर करता है कि कैसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया, पशुओं और उनके स्वामियों के लिए पीड़ा का कारण बन गई थी। प्रस्तावित एकीकृत पशु अतिचार नियंत्रण, पशु स्वामित्व, पशु कल्याण, क्षतिपूर्ति एवं सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के आलोक में, यहाँ विस्तृत सुझाव दिए गए हैं:

1) कलोनीअल नीति का अंत

ब्रिटिश काल में धारा 8 का उद्देश्य केवल जब्ती की प्रक्रिया को कानूनी रूप देना था, ताकि राजस्व और दंड सुनिश्चित हो सके। इसमें पशु के जीवन या उसके कष्टों के लिए कोई स्थान नहीं था। नए अधिनियम में इस ‘केवल रिकॉर्ड-कीपिंग’ वाली मानसिकता को समाप्त कर ‘तत्काल राहत और प्रविष्टि’ की नीति अपनानी चाहिए, जिसमें रिकॉर्ड दर्ज करने से पहले पशु को पानी और प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य हो।

2) संविधान के साथ अनुरूपता

पशुओं को घंटों तक बिना पानी और चारे के रिकॉर्ड के इंतजार में रखना अनुच्छेद 51A और अनुच्छेद 48 के विरुद्ध है। नया कानून यह सुनिश्चित करेगा कि प्रविष्टि की प्रक्रिया इतनी सरल और त्वरित हो कि वह पशु के मौलिक कल्याण में बाधक न बने। नए कानून के अनुसार जो भी पशु कांजी हौस लाया गया हैं पहले उसके चारे और पाणी की व्यवस्था की जाए एवं तुरंत पशु चिकित्सक को उसकी जाँच के लिए सूचित किया जाए। जिस दिन पशु लाया गया उस दिन ही उसकी जांच की जानी चाहिए ऐसा नियम हो, अगर न हो तो कांजी हौस के कर्मचारी एवं सरकार द्वारा नियुक्त पशु चिकित्सक दोनों को उत्तरदायी ठहराया जाए।

3) ग्रामीण और शहरी जगहों पर उपयोगिता

शहरी क्षेत्रों में, जहाँ पालतू कुत्तों या आवारा पशुओं द्वारा हमले की घटनाएं होती हैं, वहां प्रविष्टि में ‘घटना का संक्षिप्त विवरण’ और ‘पशु के व्यवहार’ को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे शहरी विवादों में कानूनी साक्ष्य जुटाना आसान होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु के विशिष्ट पहचान चिह्नों के साथ-साथ उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को भी दर्ज किया जाए।

4) स्थानीय संस्थाओं को इस मामले मे विवाद सुलझाने का अधिकार

अभिग्रहण (जब्ती) की सूचना तुरंत स्थानीय वार्ड समिति या ग्राम पंचायत को डिजिटल माध्यम से भेजी जानी चाहिए। यदि अभिग्रहणकर्ता ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है या किसी निर्दोष के पशु पकड़े हैं, तो स्थानीय निकाय को तुरंत हस्तक्षेप कर पशु को मुक्त करने का अधिकार होना चाहिए।

5) मध्यस्थम और सुलह अधिनियम, 1996 के अनुसार मामलों के निपटारे के लिए समिति का गठन

रजिस्टर में दर्ज ‘अभिग्रहणकर्ता’ और ‘स्वामी’ की जानकारी का उपयोग करते हुए सुलह समिति को तुरंत दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए बुलाना चाहिए। 1996 के अधिनियम के तहत, यह प्रविष्टि एक ‘डिस्प्यूट नोटिस’ की तरह काम करेगी, जिससे मामले को लंबा खींचने के बजाय 24-48 घंटों के भीतर सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। प्रविष्टि मे जब्त किए गए पशु की फोटो एवं विवरण पूर्णत: शामिल होना चाहिए।

6) जब्त पशुओ का कल्याण

धारा 8 में एक नया खंड (ङ) जोड़ा जाना चाहिए: “पशु की स्वास्थ्य स्थिति और उसे दिए गए तात्कालिक भोजन/पानी का विवरण।” प्रविष्टि तभी पूर्ण मानी जाए जब रखवाला यह प्रमाणित करे कि पशु को उचित व्यवस्था में रखा गया है। बछड़ों या बीमार पशुओं के लिए विशेष चिकित्सा प्रविष्टि अनिवार्य होनी चाहिए।

7) आवारा पशुओ के टीकाकरण एवं नसबंदी

यदि लाया गया पशु आवारा (Stray) है और उसका कोई स्वामी नहीं है, तो प्रविष्टि के समय ही स्थानीय पशु चिकित्सक को सूचित किया जाए। रजिस्टर में यह दर्ज होना चाहिए कि क्या पशु का टीकाकरण या नसबंदी पहले हुई है। यदि नहीं, तो उसे इस प्रक्रिया के लिए चिन्हित किया जाए। टीकाकरण एवं नसबंदी करने के बाद कोई न कोई टैग आवारा पशु को लगाया जाना चाहिए जिससे भविष्य मे उसकी पहचान करना आसान हो जाए।

अगर कोई व्यक्ति आवारा पशु को जब्त करने से रोकता हो तो उस आवारा पशु का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व उस व्यक्ति को दिया जाना चाहिए। अगर यह उत्तरदायित्व लेने से वह व्यक्ति इंकार करता हैं तो उसे किसी भी आवारा पशु के जब्ती मे हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति की मूलभूत जानकारी जैसे नाम, पता एवं पहचान हेतु फोटो डिजिटल रजिस्टर मे दर्ज किया जाना चाहिए। यह प्रावधान इसके लिए जरूरी हैं क्यू की हाल ही मे सर्वोच्च न्यायलय के आवारा कुत्तों को उचित आवास मे रखने एवं उनका टीकाकरण करने के आदेश के खिलाफ देशभर मे सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। ये वही लोग हैं जो विदेशों की तारीफ करते नहीं थकते पर स्वयं कोई उत्तरदायित्व अथवा कर्तव्य निभाते नहीं। जिस विदेश का ये महिमामंडन करते हैं उसी विदेश मे आवारा पशुओं को सरकारी पशु आवास मे रखा जाता हैं।

8) आवासीय क्षेत्र मे पाले हुए जानवरों के कारण होने वाले नुकसान एवं हमले के लिए क्षतिपूर्ति

आवासीय क्षेत्रों में जब्ती के समय, नुकसान का प्रारंभिक मूल्यांकन (Assessment) भी रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए। इससे बाद में होने वाले विवादों और दावों में पारदर्शिता आएगी और स्वामी को उचित क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य किया जा सकेगा।

9) पोलिस एवं पशु मित्रों का हस्तक्षेप पशु और जनता की सुरक्षा के लिए

रजिस्टर में प्रविष्टि के समय स्थानीय ‘पशु मित्र’ का गवाह के रूप में हस्ताक्षर होना चाहिए। इससे रखवाले द्वारा रिकॉर्ड में हेराफेरी या रिश्वतखोरी की संभावना समाप्त होगी। पुलिस का हस्तक्षेप केवल तभी हो जब अभिग्रहणकर्ता और स्वामी के बीच हिंसक टकराव की स्थिति बने। डिजिटल रिकार्ड मे पशु मित्र की पूर्ण जानकारी प्रविष्टि के अंत मे लिखी जानी चाहिए। इसके लिए कांजी हौस के कर्मचारी, इस अधिनियम के तहत गठित विविध समितियाँ, पशु मित्र, पशु चिकित्सक इनके लिए पंजीकरण प्रोसेस कर एक डिजिटल पहचान पत्र बनाया जाना चाहिए। सभी व्यक्तियों को विशेष नियुक्ति पहचान पत्र मिलने पर उनके द्वारा किए गए कार्यों का एक डाटाबेस भी अपने आप बन सकेगा। सभी व्यक्तियों का भी एक डाटाबेस पोर्टल रहेगा तो और भी पारदर्शिता आएगी।

10) आधुनिकीकरण

हस्तलिखित रजिस्टरों और रसीदों के स्थान पर ‘डिजिटल रसीद’ प्रणाली लागू की जानी चाहिए। पशु की फोटो खींचकर उसे ऐप पर अपलोड करते ही समय, स्थान और विवरण स्वतः दर्ज (Auto-fill) हो जाने चाहिए। इससे साक्षरता की कमी आड़े नहीं आएगी और रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनी रहेगी। डिजिटल रिकार्ड स्थानीय आधिकारिक भाषा मे लिखा जाना चाहिए एवं हिन्दी मे इसका अपने आप अनुवाद हो सके इसके हिसाब से पोर्टल/एप को बनाया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इन दो भाषाओ के अलावा अन्य भाषा अथवा अंग्रेजी मे अनुवाद चाहता हो तो इसके लिए अनुवाद शुल्क देकर अनुवाद की व्यवस्था की जानी चाहिए। हा अंग्रेजी भाषा के अनुवाद के लिए अनुवाद शुल्क लगाने से स्थानीय भाषा एवं हिन्दी सीखना जरूरी हो जाएगा।

11) लोगों के लिए रोजगार के अवसर

प्रत्येक कांजी हाउस में एक ‘पशु पंजीयक’ (Animal Registrar) का पद सृजित किया जाए, जो केवल डेटा प्रबंधन और कल्याण रिपोर्टिंग का कार्य करे। यह पद स्थानीय शिक्षित युवाओं के लिए होगा, जो तकनीक के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और मानवीय बनाएंगे।


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