भारत में प्राचीन स्मारकों और धरोहर संरक्षण के कानून: केंद्र और सभी राज्यों की पूरी सूची

सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर को बचाने, उसका संवर्धन करने हेतु भारत मे कई कानून हैं। एक मुख्य केन्द्रीय कानून हैं और हर राज्य के लिए अलग कानून भी हैं। यहाँ सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन स्मारकों के संरक्षण के लिए लागू कानूनों की हिंदी सूची है:

केन्द्रीय कानून

प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 – यह पूरे देश मे लागू हैं और इसके तहत जो प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष आते हैं उनका पूरा उत्तरदायित्व भारत सरकार का हैं। किसी भी राज्य के जो भी स्थल इस कानून के तहत संरक्षित होते हैं उनपर उस राज्य का इस विषय का कानून नहीं लागू होता।

Protecting the Divine: Law, Temples, and Heritage under the AMASR Act
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राज्य

  • आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1960 – यह केवल आंध्र प्रदेश राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व आंध्र प्रदेश सरकार का हैं।
  • अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश विरासत अधिनियम, 2015 – यह केवल अरुणाचल प्रदेश राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व अरुणाचल प्रदेश सरकार का हैं।
  • असम: असम प्राचीन स्मारक और अभिलेख अधिनियम, 1959 – यह केवल असम राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व असम सरकार का हैं।
  • बिहार: बिहार प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1976 – यह केवल बिहार राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व बिहार सरकार का हैं।
  • छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2004 – यह केवल छत्तीसगढ़ राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व छत्तीसगढ़ सरकार का हैं।
  • गोवा: गोवा प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1978 – यह केवल गोवा राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व गोवा सरकार का हैं।
  • गुजरात: गुजरात प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1965 – यह केवल गुजरात राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व गुजरात सरकार का हैं।
  • हरियाणा: पंजाब प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1964। ये कानून हरियाणा में लागू होता हैं। यह केवल हरियाणा राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व हरियाणा सरकार का हैं।
  • हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1976 – यह केवल हिमाचल प्रदेश राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व हिमाचल प्रदेश सरकार का हैं।
  • झारखंड: झारखंड प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2016 – यह केवल झारखंड राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व झारखंड सरकार का हैं।
  • कर्नाटक: कर्नाटक प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1961 – यह केवल कर्नाटक राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व कर्नाटक सरकार का हैं।
  • केरल: केरल प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1968 – यह केवल केरल राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व केरल सरकार का हैं।
  • मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1964 – यह केवल मध्य प्रदेश राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व मध्य प्रदेश सरकार का हैं।
  • महाराष्ट्र: महाराष्ट्र प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1960 – यह केवल महाराष्ट्र राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व महाराष्ट्र सरकार का हैं।
  • मणिपुर: मणिपुर प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1976 – यह केवल मणिपुर राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व मणिपुर सरकार का हैं।
  • मेघालय: मेघालय विरासत प्राधिकरण अधिनियम, 2012 – यह केवल मेघालय राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व मेघालय सरकार का हैं।
  • मिजोरम: मिजोरम प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2001 – यह केवल मिजोरम राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व मिजोरम सरकार का हैं।
  • नागालैंड: नागालैंड प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2021 – यह केवल नागालैंड राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व नागालैंड सरकार का हैं।
  • ओडिशा: ओडिशा प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1956 – यह केवल ओडिशा राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व ओडिशा सरकार का हैं।
  • पंजाब: पंजाब प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1964 – यह केवल पंजाब राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व पंजाब सरकार का हैं।
  • राजस्थान: राजस्थान स्मारक, पुरातात्विक स्थल और पुरावशेष अधिनियम, 1961 – यह केवल राजस्थान राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व राजस्थान सरकार का हैं।
  • सिक्किम: सिक्किम विरासत संरक्षण और रखरखाव अधिनियम, 2011 – यह केवल सिक्किम राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व सिक्किम सरकार का हैं।
  • तमिलनाडु: तमिलनाडु प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1966 – यह केवल तमिलनाडु राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व तमिलनाडु सरकार का हैं।
  • तेलंगाना: तेलंगाना प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1960 – यह केवल तेलंगाना राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व तेलंगाना सरकार का हैं।
  • त्रिपुरा: त्रिपुरा प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1997 – यह केवल त्रिपुरा राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व त्रिपुरा सरकार का हैं।
  • उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1956 – यह केवल उत्तर प्रदेश राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व उत्तर प्रदेश सरकार का हैं।
  • उत्तराखंड: उत्तराखंड प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2015 – यह केवल उत्तराखंड राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व उत्तराखंड सरकार का हैं।
  • पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल विरासत आयोग अधिनियम, 2001 – यह केवल पश्चिम बंगाल राज्य के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व असम सरकार का हैं।

केंद्र शासित प्रदेश

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, लद्दाख, लक्षद्वीप एवं पुदुचेरी: प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 – यह सभी केंद्र शासित प्रदेश हैं इसके लिए सभी प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेषो के लिए केंद्र सरकार का कानून लागू होगा और सभी के लिए केंद्र सरकार उत्तरदायी होगी।
  • दिल्ली: दिल्ली प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 2004 – यह केवल दिल्ली के प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व दिल्ली सरकार का हैं।
  • जम्मू और कश्मीर: जम्मू और कश्मीर विरासत संरक्षण और रखरखाव अधिनियम, 2010 – यह केवल जम्मू और कश्मीर राज्य प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष पर लागू होता हैं और उनका उत्तरदायित्व जम्मू और कश्मीर सरकार का हैं।

इन सभी कानूनों के तहत अनेक नियम एवं उप नियम बनाए गए हैं उसपर चर्चा के लिए ही यह लेखमाला rinkutai.com इस वेबसाईट पर प्रकाशित की जा रही हैं। पर आपको यह बात समझनी होगी की आपकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को बचाने के लिए आपको स्वयं प्रयास करने पड़ेंगे तभी जाकर हमारी धरोहर बच पाएगी। सरकार के भरोसे हिन्दू ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को नहीं बचाया जा सकेगा। ऐसा क्यू है यही आपको इस लेखमाला से पता चलेगा। इसीलिए इस लेखमाला को पढ़ने के लिए इस वेबसाईट को बुकमार्क कर लीजिए और हर रोज केवल एक लेख पढिए और बाकी लोग भी इस यात्रा मे सहभागी हो इसके लिए इस इस वेबसाईट को शेयर करिए।

अगर हिन्दू मंदिरों को बचाना हैं तो मंदिर विश्वस्तों को संगठित होना पड़ेगा। मंदिरों को एकता ही हर तरह के धोखे से मंदिरों को बचा सकते हैं।

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