आरोप

आरोप

ब्रिटिश कंपनी राज के आरंभ मे कई बार व्यक्ति को कैद करने बाद भी जल्दी बताया भी नहीं जाता था की उसे कैद किस अपराध के लिए किया गया हैं। 1857 की स्वतंत्रता क्रांति के बाद कई कानूनों मे बदलाव करना ब्रिटिश राज के लिए आवश्यक हो गया था, क्यू की 1857 के क्रांति के कई अभियुक्त अभी भी कैद मे थे और भले ही क्रांति विफल रही पर उस मशाल ने हर नागरिक के मन मे स्वतंत्रता की ज्योति जला दी थी।

जमानत भाग 3: भारतीय हिन्दू ग्रंथों मे उल्लेख

जमानत भाग 3: भारतीय हिन्दू ग्रंथों मे उल्लेख

भारतीय हिन्दू धर्मग्रंथों के नियम क्या आज के जमाने मे भी लागू करने योग्य थे? आपके क्या विचार हैं कमेन्ट करिए एवं चर्चा को शुरू करिए।

जमानत भाग 2

जमानत भाग 2

BNSS इस नए कानून मे जमानत से जुड़े जमानतपत्र एवं बंधपत्र की परिभाषाओं से क्या कोर्ट की कार्यवाही का समय बचेगा? आपके विचार कमेन्ट करें एवं चर्चा को आरंभ करिए।

श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन

श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन

"श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन" (Audio-Video Electronic Means) की परिभाषा मे और भी अन्य उपकरणों को शामिल करने के लिए क्या केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिलकर टेक्नॉलजी मे होने वाले नए नए बदलाव के अनुसार जल्द से जल्द बदलाव करने चाहिए? इस विषय पर कमेन्ट कर चर्चा शुरू करिए?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023: धारा 1

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023: धारा 1

बीएनएसएस  की पहली धारा कानून को औपचारिक रूप देती है। यह बताती है कि इस संहिता का नाम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 है। यह संहिता जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत पर लागू होती है। पर इस संहिता के अध्याय 9, 11 और 12 के प्रावधान और उससे जुड़े अन्य प्रावधान पूरे नागालैंड और आसाम के उन जनजातीय क्षेत्रों मे लागू नहीं होंगे जिनका समावेश संविधान की छठी सूची के पैरा 20 मे दि. 21 जनवरी 1972 के ठीक पहले किया गया था।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023: तुलनात्मक विमर्श, आलोचना और न्यायिक चुनौतियों पर पुस्तक की विस्तृत प्रस्तावना

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023: तुलनात्मक विमर्श, आलोचना और न्यायिक चुनौतियों पर पुस्तक की विस्तृत प्रस्तावना

१. परिवर्तन की अनिवार्यता और वर्तमान विमर्श भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) का आगमन एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) का स्थान लेती है, जो स्वयं ब्रिटिश भारत में अधिनियमित ‘कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1898’ की पुनरावृत्ति थी। यह पुस्तक इसी मौलिक वैधानिक […]

TOP