2. पशु: इस परिभाषा को और अधिक व्यापक और सरल बनाया जाना चाहिए। पशु से अभिप्राय उन सभी पालतू (domestic) और आवारा (stray) रीढ़धारी प्राणियों से है जो मानवीय देखरेख में हैं या सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं। इसमें गाय, भैंस, घोड़ा, गधा, खच्चर, सुअर, भेड़, बकरी, ऊंट और हाथी के साथ-साथ अब कुत्ते, बिल्ली और अन्य सभी पालतू पक्षी या जानवर भी शामिल होंगे जो किसी की संपत्ति या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
पशु अतिचार अधिनियम १८७१: धारा 2, धारा 3
2. पशु: इस परिभाषा को और अधिक व्यापक और सरल बनाया जाना चाहिए। पशु से अभिप्राय उन सभी पालतू (domestic) और आवारा (stray) रीढ़धारी प्राणियों से है जो मानवीय देखरेख में हैं या सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं। इसमें गाय, भैंस, घोड़ा, गधा, खच्चर, सुअर, भेड़, बकरी, ऊंट और हाथी के साथ-साथ अब कुत्ते, बिल्ली और अन्य सभी पालतू पक्षी या जानवर भी शामिल होंगे जो किसी की संपत्ति या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
पशु अतिचार अधिनियम, 1871: विश्लेषणात्मक आलोचना
पशु अतिचार अधिनियम, 1871, स्पष्ट रूप से ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन की नीतियों और प्राथमिकताओं का परिणाम था, जिसका प्रभाव इस कानून के निर्माण और विस्तार दोनों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह अधिनियम सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन की भूमि राजस्व संग्रह और नकद फसलों को बढ़ावा देने की नीति से जुड़ा हुआ था। ब्रिटिश सरकार के लिए कृषि भूमि की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे उनका राजस्व आता था।
पशु अतिचार अधिनियम १८७१ को निरस्त करने हेतु निवेदन
कृपया इस ब्रिटिश कालीन कानून को निरस्त करने हेतु नीचे दिए लाल बटन को प्रेस करिए। अपना मेल एप एवं अकाउंट सिलेक्ट करिए, मेल अपने आप टाइप होकर आ जाएगा। आपको केवल सेन्ड करना हैं। सेवा में, 1. प्रधान मंत्री, भारत सरकार, साउथ ब्लॉक, रैसिन हिल्स, नई दिल्ली। 2. विधि एवं न्याय मंत्रालय, शास्त्री भवन, […]
