पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 11

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 11

यह धारा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करती है, यह परिभाषित करती है कि किन सरकारी संपत्तियों को अतिचार से सुरक्षित रखा जाना है और कौन से अधिकारी अतिचार करने वाले पशुओं को ज़ब्त कर सकते थे। महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्माण मे शामिल थे, सार्वजनिक सड़कें, आमोद-प्रमोद स्थल (पार्क), नहरें, जल-निकास के कार्य (ड्रेनेज), बाँध, साथ ही, इन सड़कों, नहरों या बाँधों के किनारे या ढलान (Sides or Slopes) को भी सुरक्षा प्रदान की गई थी। अतिचार करने वाले या भटकते हुए पाए गए पशुओं को पकड़ने का अधिकार इन सड़कों, नहरों, बाँधों आदि के भारसाधक व्यक्ति, यानी, वे अधिकारी जो उनके रखरखाव और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार थे और पुलिस के अधिकारी को दिया गया था। ज़ब्त किए गए पशुओं को पकड़ने वाले अधिकारी को चौबीस घंटे के भीतर उन्हें निकटतम कांजी हौस को भेजना या भिजवाना अनिवार्य था।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 10

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 10

3. पुलिस की सुधारात्मक भूमिका: पुलिस केवल तभी हस्तक्षेप करेगी जब पशु के साथ क्रूरता की जा रही हो या जान-माल का खतरा हो। पुलिस का कार्य किसी एक पक्ष को संरक्षण देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि पशु को सुरक्षित और मानवीय तरीके से आश्रय केंद्र तक पहुँचाया जाए। अगर पालतू पशु हिंसक बन गया हो तो भी अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस का हस्तक्षेप होना चाहिए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 10

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 10

3. पुलिस की सुधारात्मक भूमिका: पुलिस केवल तभी हस्तक्षेप करेगी जब पशु के साथ क्रूरता की जा रही हो या जान-माल का खतरा हो। पुलिस का कार्य किसी एक पक्ष को संरक्षण देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि पशु को सुरक्षित और मानवीय तरीके से आश्रय केंद्र तक पहुँचाया जाए। अगर पालतू पशु हिंसक बन गया हो तो भी अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस का हस्तक्षेप होना चाहिए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 9

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 9

2. समय-बद्ध सूचना और मुक्ति: पशु के केंद्र में आने के ६ घंटे के भीतर यदि मालिक की पहचान हो जाती है, तो उसे सूचित किया जाना अनिवार्य होगा। यदि मालिक आर्थिक रूप से असमर्थ है, तो उसे 'किस्त' (Installments) में भुगतान करने या सामुदायिक सेवा के बदले पशु ले जाने का विकल्प दिया जाए, ताकि वह अपने आजीविका के साधन से हाथ न धोए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 8

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 8

1. तत्काल पशु राहत (First Aid and Fodder): किसी भी पशु के केंद्र में प्रवेश करते ही, रिकॉर्ड दर्ज करने से पहले, रखवाला उसे पानी और चारा उपलब्ध कराए। यदि पशु घायल है, तो तुरंत पशु चिकित्सक को सूचित किया जाए। पशु चिकित्सक को भी सूचना मिलते ही जल्द से जल्द पोहोचने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 7

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 7

3. सूचना का अधिकार: ब्रिटिश काल में ये रजिस्टर गुप्त रखे जाते थे ताकि पशुपालक को अपनी स्थिति का पता न चले। अब इन सभी रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अगर पूरी फाइल किसी मामले की चाहिए हो तो उसे सूचना के अधिकार की अर्जी देकर प्राप्त करने के प्रावधान भी लिखे जाने चाहिए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 6

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 6

3. प्रशिक्षण और संवेदीकरण: नियुक्त व्यक्ति को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए। उसका लक्ष्य पशुओं को 'कैदी' की तरह नहीं, बल्कि 'संरक्षण' में आए जीव की तरह प्रबंधित करना हो।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 5 

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 5 

2. मनमाने शुल्क निर्धारण पर रोक: डीएम द्वारा एकतरफा शुल्क (charges) तय करने की व्यवस्था ने गरीब पशुपालकों का शोषण किया है। इसे हटाकर एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लानी चाहिए जो स्थानीय बाजार की दरों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखे। ऐसी व्यवस्था पंचायती राज से जुड़े कई कानूनों मे पहले से हैं पर यह प्रावधान उनके विपरीत हैं, इसीलिए इस कानून मे बदलाव करना आवश्यक हैं।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 4

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 4

4. नागरिक सुरक्षा और सेवा: इन केंद्रों का प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों को आवारा जानवरों से होने वाली असुविधा से बचाना और साथ ही उन बेजुबान जानवरों को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करना हो। यह सरकार के संवैधानिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 48A और 51A(g)) का हिस्सा माना जाए।

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 4

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 4

4. नागरिक सुरक्षा और सेवा: इन केंद्रों का प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों को आवारा जानवरों से होने वाली असुविधा से बचाना और साथ ही उन बेजुबान जानवरों को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करना हो। यह सरकार के संवैधानिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 48A और 51A(g)) का हिस्सा माना जाए।

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